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कर्मों का फल हैं ये 4 प्रकार के पुत्र

हमारे जन्म लेने पर हमारा वश नहीं है। हम अपनी इच्छा से जन्म लेने लिए किसी घर परिवार का चुनाव नहीं कर सकते। जन्म लेने के लिए घर-परिवार का चुनाव करता है हमारा भाग्य। जो हमारे पैदा होने से पहले ही तय हो चुका होता है, और हमारा भाग्य बनाते हैं हमारे पिछले जन्म के कर्म। हमें जन्म के समय जो कुछ भी मिलता है वो हमारे पिछले जन्म के कर्मों का फल है।

कर्मों के अनुसार मिलते हैं सम्बन्धी  

हमारे पूर्व जन्मों का फल हमें इस जन्म में मिलता है, और पूर्व जन्म के कर्म से ही हमें इस जन्म में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका, मित्र-शत्रु, सगे-सम्बन्धी इत्यादि मिलते हैं। संसार में जितने भी रिश्ते नाते हैं सब हमारे पिछले जन्म के कर्म के आधार पर ही हमें मिलते हैं। हमारा उनसे लेनदेन इस जन्म का नहीं होता।

कर्मों के अनुसार ही प्राप्त होते हैं पुत्र या पुत्री

जिस प्रकार हमारे सभी सम्बन्धी हमें अपने पिछले जन्म के कर्मों के कारण मिले हैं, वैसे ही पुत्र भी हमारा पिछले जन्म के कर्मों का ही फल हैं। शास्त्रों के अनुसार हमारा कोई पिछले जन्म का संबंधी ही हमारे यहाँ आकर पुत्र के रूप में जन्म लेता है।

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मिलते हैं 4 प्रकार के पुत्र

पिछले जन्म के कर्म के अनुसार हमें इस जन्म में 4 प्रकार के पुत्र संतान के रूप में मिलते हैं। जो अपने गुणों तथा अवगुणों से अलग पहचाने जाते हैं।

1. ऋणानुबंध पुत्र

पूर्व जन्म में किसी से लिया हुआ क़र्ज़ (ऋण) अथवा आपके द्वारा किया गया किसी का नुक्सान या किसी प्रकार से आपने किसी की संपत्ति नष्ट की हो, तो यह पुत्र आपके घर में जन्म लेता है। इस तरह का पुत्र अपने साथ कोई बीमारी लेकर आता है, और आपका धन गंभीर बीमारी या व्यर्थ के कामों में तब तक नष्ट होता रहता है जब तक कि उसका पूरा हिसाब ना हो जाये। यही नियति है।

2. शत्रु पुत्र

यह पुत्र पूर्व जन्म का आपका कोई सबसे बड़ा शत्रु होता है जोकि आपसे बदला लेने के लिए आया है। इस प्रकार के पुत्र बड़े होने पर अपने माता-पिता से लड़ाई-झगड़ा करके उन्हें पूरी ज़िन्दगी किसी ना किसी प्रकार से कष्ट पहुँचाने का कार्य करता है, और यह तब तक करते हैं जब तक कि उसके पूर्व जन्म का हिसाब ना हो जाए।

3. उदासीन पुत्र

इस प्रकार के पुत्र जन्मोपरांत अर्थात बड़े होने पर अपने माता-पिता की सेवा नहीं करते। अपितु अपना विवाह करके उनसे अलग हो जाते हैं। ऐसे पुत्र पशु के समान कहलाते हैं और इस प्रकार से आपके पूर्व जन्म का हिसाब करते हैं।

4. सेवा करने वाला पुत्र

इस प्रकार का पुत्र आपके द्वारा पिछले जन्म में की गयी सेवा का फल है। जो कि पुत्र या पुत्री का रूप लेकर आता है और आपकी सेवा का क़र्ज़ चुकाता है। और अपने माता-पिता को हर प्रकार से सुख देता है। उनकी सेवा करता है।

मित्रो इसलिए कहते हैं कि

“जैसी करनी , वैसी भरनी , जो बोया था वोही काटोगे”

इसलिए किसी के साथ कभी बुरा ना करो, क्योंकि प्रकृति का नियम है। यदि आप बुरा करोगे तो आपको अगले जन्म में उन सब बुरे कर्मों का फल मिलेगा और उस समय आप सिर्फ रो सकते हैं जो आप कर चुके हैं उसे बदल नहीं सकते। इसलिए प्रयास करें कि आप चौथे प्रकार के पुत्र बनें। यही आपका इस जन्म में बोया गया बीज होगा जो न सिर्फ अगले जन्म में आपको फल देगा बल्कि इस जन्म में भी आपके भाग्य के सारे रास्ते खोल देगा।

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मेरा अनुरोध: 

मेरा आप सभी पाठकों से यही कहना है कि हमारे मरणोपरांत हमारे साथ कुछ नहीं जाता। जाते हैं तो हमारे द्वारा किये गए अच्छे बुरे कर्म ही जाते हैं। सारा पैसा बैंक में, सारा सोना चाँदी, दौलत तिजोरी में ही रखे रह जाते हैं। मुँह में लगा सोने का दांत भी साथ नहीं जा पाता। हमारे साथ तो हमारे किये हुए सत्कर्म और कुकर्म ही साथ जाते हैं।

अगर आपकी संतान अच्छी है, योग्य है तो सब धन दौलत बना लेगी, किन्तु यदि आपकी औलाद नालायक है तो आपका संचय किया हुआ धन भी चंद दिनों में ही बर्बाद कर देगी। साथ जाएगी तो बस नेकियां। इसलिए जितना हो सके सही कर्म करें, नेकी करें, इन्सान की मदद करें। धन्यवाद।

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5 COMMENTS

  1. Sir ek insaan Marta hai to agle janm mein usse ek hi sarir milega na fir aisa kyu ek Marta hai char janm lete hai humare Bharat Desh ki janshankhya kitni badti jarahi hai
    Kya Charles Darwin ki theory thik hai kya sir please reply jarur kare

    • आपकी बात सही है हर्ष जी कि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद कोई न कोई शरीर तो मिलता ही है, लेकिन कर्मो के अनुसार उस प्राणी को कौनसा शरीर मिलेगा, यह उस परमात्मा के ही हाथ में होता है। यह कोई नहीं जानता के अगले जनम में कौन क्या बनेगा, या उसे कौनसा शरीर मिलेगा। और रही बात भारत की जनसँख्या और डार्विन की थ्योरी की, हर बात के पीछे प्रक्रति का विज्ञानं अपने नियमों के अनुसार कार्य करता है। आपको ऐसा लग रहा है कि केवल भारत की जनसँख्या बढ़ रही है। ऐसा नहीं है, भारत की ही नहीं अपितु पूरे विश्व की जनसँख्या वृद्धि का एक यह कारण भी है की मनुष्य ने प्रक्रति के साथ छेड़-छाड़ करके बहुत सारी प्रजातियाँ समाप्त कर दी हैं। और उन समाप्त हो चुके जीवों को भी तो कोई न कोई शरीर चाहिए ही, वह आत्माएं भी नए मानव शरीरों को धारण कर रही हैं। इसलिए मानव की जनसँख्या का स्तर बहुत अधिक बढ़ चुका है। लेकिन साथ ही इस विषय पर अधिक चर्चा करने के लिए लम्बा समय चाहिए। हम भविष्य में कोशिश करेंगे की इस विषय पर और भी अधिक खोज करके आपके प्रश्नों का सटीक उत्तर दे सकें…धन्यवाद।

  2. Sir ek insaan Marta hai to agle janm mein usse ek hi sarir milega na fir aisa kyu ek Marta hai char janm lete hai humare Bharat Desh ki janshankhya kitni badti jarahi hai
    Kya Charles Darwin ki theory thik hai kya sir please reply jarur kare

    • आपकी बात सही है हर्ष जी कि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद कोई न कोई शरीर तो मिलता ही है, लेकिन कर्मो के अनुसार उस प्राणी को कौनसा शरीर मिलेगा, यह उस परमात्मा के ही हाथ में होता है। यह कोई नहीं जानता के अगले जनम में कौन क्या बनेगा, या उसे कौनसा शरीर मिलेगा। और रही बात भारत की जनसँख्या और डार्विन की थ्योरी की, हर बात के पीछे प्रक्रति का विज्ञानं अपने नियमों के अनुसार कार्य करता है। आपको ऐसा लग रहा है कि केवल भारत की जनसँख्या बढ़ रही है। ऐसा नहीं है, भारत की ही नहीं अपितु पूरे विश्व की जनसँख्या वृद्धि का एक यह कारण भी है की मनुष्य ने प्रक्रति के साथ छेड़-छाड़ करके बहुत सारी प्रजातियाँ समाप्त कर दी हैं। और उन समाप्त हो चुके जीवों को भी तो कोई न कोई शरीर चाहिए ही, वह आत्माएं भी नए मानव शरीरों को धारण कर रही हैं। इसलिए मानव की जनसँख्या का स्तर बहुत अधिक बढ़ चुका है। लेकिन साथ ही इस विषय पर अधिक चर्चा करने के लिए लम्बा समय चाहिए। हम भविष्य में कोशिश करेंगे की इस विषय पर और भी अधिक खोज करके आपके प्रश्नों का सटीक उत्तर दे सकें…धन्यवाद।

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