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योगमुद्रासन करने से पेट तथा हमारी आँतों के सभी विकार दूर होने लगते हैं

योगमुद्रासन की विधि एवं लाभ जानने के पश्चात आप इसे हर रोज करने लगेंगे। इस आसन को करने से आपके पेट के आधे से ज्यादा रोग समाप्त हो जायेंगे। इस लिए यह योगमुद्रासन को आप अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें। योग में यह मुद्रा अति महत्त्वपूर्ण है, इसलिए यह योगासन योगमुद्रासन कहलाता है।  

योगमुद्रासन की विधि:

  • सर्वप्रथम एक साफ़, स्वच्छ एवं हवादार स्थान का चुनाव करके वहां चटाई या चादर का आसन लगाये।
  • अब आप आराम से पद्मासन लगा कर अपने दोनों हाथों को पीठ  की तरफ आराम से ले कर जाएँ।
  • अब आप अपने एक हाथ से पीठ के पीछे की ओर से दूसरे हाथ की कलाई को पकड़ लें।
  • अब श्वास छोड़ते हुए शरीर को आगे की तरफ झुका कर भूमि पर टेक दें और श्वास को रोक कर लें।
  • ध्यान रहे की जब आप आगे की तरफ झुक रहे तब तक कमर और नितंब ऊपर की तरफ ना उठायें।
  • अब धीरे धीरे सांस अंदर की तरफ खींचते हुए सिर को उठायें और पुन अपनी पहली अवस्था में आ जाएँ ।
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कितने प्रकार का होता है योगासन?

योगमुद्रासन से होने वाले लाभ:

1. रीढ़ की हड्डी का लचीलापन

इस आसन को करने से आप की कमर की हड्डी लचीली होने के साथ साथ मजबूत भी हो जाती है। इससे स्नायुतंत्र में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे आप स्वस्थ रह सकते है।

2. पेट की समस्या में लाभ

योगमुद्रासन को करने से हमारे पेट में होने वाली तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। उदाहरण के लिए पेट का साफ़ ना होना, पेट में गैस बनना तथा भूख ना लगना। इसके साथ ही आतों में होने वाली बीमारियाँ भी कम हो सकती है।

3. मोटापे से छुटकारा       

योगमुद्रासन करने से जिन लोगों के पेट में अधिक चर्बी होती है। इस आसन को नियमित करने से पेट की चर्बी कम हो जाती है, साथ ही मोटापे से भी छुटकारा मिल जाता है।

4. नाभि रहती है अपने स्थान पर

जिन लोगों की बार-बार नाभि हिल जाती है, अथवा अपने स्थान से हट जाती है। उन्हें यह आसन अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से नाभि के साथ-साथ पेट के अन्य अंगों को बल मिलता है। वे अपने स्थान पर स्थिर रहकर सुचारु रूप से कार्य करते रहते है।

योगमुद्रासन में सावधानियां:

योगमुद्रासन की विधि एवं लाभ जानने के पश्चात इस आसन को एकदम से करना शुरू ना करें। पहले ये जांच ले कि आप को ये आसन करना चाहिए अथवा नहीं। यदि आपकी शारीरिक स्थिति ऐसी है कि आप को ये आसन नहीं करना चाहिए तो ना करें।  

  • योगमुद्रासन अपनी क्षमता अनुसार ही करना चाहिए। यदि आप अपनी क्षमता से अधिक करते हैं तो इससे आपको हानि का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • हर्निया, उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था तथा साईटिका से पीड़ित पुरुष अथवा महिला इस आसन को ना करें।
  • आसन को किसी निपुण योगा प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।

स्वास्तिकासन की विधि एवं लाभ

किन रोगों में लाभदायक:

1. मधुमेह (diabetes)

इस आसन को करने से पैनक्रियाज़ का व्यायाम होता है। पैनक्रियाज़ ग्रंथि में रक्त संचार बढ़ने से विकार में कमी आने लगती है। इससे विकृत पैनक्रियाज़ भी धीरे-धीरे ठीक होकर काम करने लगता है। यदि सटीक आयुर्वेदिक औषधियों एवं अन्य योगासनों के साथ इसे किया जाए तो मधुमेह (diabetes) जैसी घातक बिमारी से छुटकारा मिल सकता है।

2. मोटापा (obesity)

योगमुद्रासन को करने से पेट कि चर्बी को कम होती है, यकृत या लीवर ठीक से अपना काम करने लगता है। जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है।   

3. कब्ज़ (constipation)

अक्सर देखा जाता है कि कब्ज कि वजह से ही हमारे शरीर में ढेर सारी बीमारियाँ उत्पन्न होती है। इस आसन को करने से ना सिर्फ कब्ज से ही छुटकारा मिलता है, बल्कि उन सभी बिमारियों से भी दूरी बनी रहती है जो कि कब्ज की वजह से उत्पन्न होती है।

हमें आशा है कि योगमुद्रासन की विधि एवं लाभ सम्बन्धी इस लेख को पढ़कर आप इसका लाभ अवश्य उठाएंगे तथा अपने अनुभव नीचे कमेंट बाक्स में अवश्य साँझा करेंगे।