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श्रीराम से पूछें अपनी समस्या का हल

हाँ या ना वाली दुविधा हम सभी के जीवन में कई बार आती है। या यूँ कहें कि एक दिन में कई कई बार। हम इतना परेशान हो जाते हैं कि निर्णय नहीं ले पाते और अधिकतर निर्णय लेने के बाद भी सोचते रहते हैं कि हमने सही निर्णय लिया या नहीं। ऐसे समय में मार्गदर्शन के लिए सबसे उत्तम रहता है कोई ऐसा जो आपका अपना हो। आपका भला चाहता हो। जो आपके बारे में और उन परिस्थितियों के बारे में सब कुछ जानता हो जिनसे आप गुज़र रहे हैं। ताकि उसे सब कुछ बताये बिना और समझाए बिना वो आपका मार्गदर्शन कर सके। ऐसे में ईश्वर से अधिक उत्तम और कौन हो सकता है। इसीलिए बनाई गई कई प्रश्नावलियाँ जिनकी सहायता से आपको न सिर्फ आपके प्रश्नों का उत्तर मिल सके बल्कि भविष्य के लिए आप सावधान एवं तैयार भी हो सकें। यहाँ प्रस्तुत हैं, श्री रामशलाका प्रश्नावली।

 ये श्री राम शलाका प्रश्नावली परमपिता परमात्मा से वार्तालाप कर अपने प्रश्न का उत्तर तथा मार्गदर्शन पाने का एक साधन है। इस श्री राम शलाका प्रश्नावली के माध्यम से बनती चौपाईयां न सिर्फ आपके प्रश्नों का उत्तर देती हैं बल्कि आपके भटकते मन का मार्गदर्शन भी करती हैं।

नियम :

  • प्रश्न पूछते समय मन में श्रद्धा और विश्वास रखें।
  • मात्र परीक्षा लेने के लिए प्रश्न पूछ कर अपना समय व्यर्थ न करें।
  • 1 दिन में 3 से अधिक प्रश्न न पूछें।  

प्रश्न पूछने की विधि :-

अपने प्रश्न का उत्तर जानने के लिए सबसे पहले अपने मन में भगवान श्रीराम जी का ध्यान करें। भगवान श्रीराम जी को प्रणाम करते हुए, कल्पना करें कि वे आपके समक्ष हैं। ऐसी कल्पना करते हुए अपने मन में ही स्पष्ट शब्दों में उनसे प्रश्न पूछें। अपने प्रश्न को स्पष्ट शब्दों में अपने मन में 3 बार दोहराएं। उसके बाद कल्पना करें कि भगवान श्रीराम जी आपके प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं। उस उत्तर को जानने के लिए श्रद्धापूर्वक दी गई प्रश्नावली के चित्र में किसी एक चौकोर खाने में अपनी उंगली या शलाका (सलाई) रख दें। इस चौकोर खाने में लिखे अक्षर को एक कागज़ पर लिख लें। उसके पश्चात् इससे आगे इसके 9वें चौकोर खाने में जो अक्षर है वो लिख लें। इस प्रकार हर 9वें खाने में दिए गए अक्षर को कागज़ पर लिखते जाएं। अंत में ये एक चौपाई बन जाएगी। ये चौपाई ही आपके प्रश्न का उत्तर है। इस उत्तर को भगवान श्रीराम जी द्वारा किया गया मार्गदर्शन मानें। जय श्रीराम।

नीचे दी गयी चौपाइयों में से जो भी चौपाई आपके प्रश्न के उत्तर के रूप में आये। उस चौपाई के नीचे दिए गए उत्तर बटन पर क्लिक करके आप अपना उत्तर जान सकता हैं।

आपके प्रश्न का उत्तर

चौपाई 01: सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।

प्रश्न का फल: प्रश्न का फल उत्तम है। कार्य की सिद्धि अवश्य होगी।

मार्गदर्शन: प्रश्न का उत्तर जान कर इतना प्रसन्न न हो जाएं कि प्रयास करना ही छोड़ दें। ईश्वर का नाम लेकर प्रयास जारी रखें।

चौपाई 02: होईही सोई जो राम रचि राखा। को करि तरक बढ़ावहि साखा।।

प्रश्न का फल: कार्य होने में संदेह है। इस लिए इस  कार्य को भगवान पर छोड़ देना ही बेहतर है।

मार्गदर्शन: प्रयास तो जारी रख सकते हैं, किन्तु एक ही बात के पीछे सब कुछ छोड़ कर बैठ जाना उत्तम नहीं है।

चौपाई 03: प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा।।

प्रश्न का फल: भगवान का स्मरण करके कार्य आरम्भ करो सफलता मिलेगी।

मार्गदर्शन: इसका अर्थ कुछ यूँ समझें कि आपका समय उत्तम है, और कार्य भी, अब तो केवल आपके परिश्रम की ही देरी है। ईश्वर का नाम लेकर अपने लक्ष्य की और बढ़ें।

चौपाई 04: उधरें अन्त न होई निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।

प्रश्न का फल: इस कार्य में भलाई नहीं है। कार्य पूरा होने में संदेह है।

मार्गदर्शन: ईश्वर चाहता है कि आप इस कार्य को छोड़ दें। समय व्यर्थ न करें। कार्य पूरा भी नहीं होगा और इस कार्य के लिए यदि आप प्रयास करेंगे तो वह हानिकर भी हो सकता है।

चौपाई 05: विधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं।।

प्रश्न का फल: खोटे मनुष्यों संग छोड़ दें। कार्य पूरा होने में अभी देर है।

मार्गदर्शन: आपकी बुरी संगति के कारण आपका कार्य पूरा होना कठिन हो सकता है। अपने आचरण शुद्ध करें और ईश्वर का नाम लेकर प्रयास जारी रखें।

चौपाई 06: मुद मंगलमय सन्त समाजू। जिमि जग जंगम तीरथराजू।।

प्रश्न का फल: प्रश्न बहुत श्रेष्ठ है कार्य सिद्ध होगा।

मार्गदर्शन: आपका समय एवं प्रयास दोनों अच्छे हैं। अपने प्रयासों से अपने सौभाग्य का लाभ उठाएं। ईश्वर का नाम लेकर पूरे परिश्रम से कार्य करें।

चौपाई 07: गरल सुधा रिपु करिय मिताई। गोपद सिन्धु अनल सितलाई।।

प्रश्न का फल: प्रश्न का फल श्रेष्ठ है। कार्य सफल होगा।  

मार्गदर्शन: प्रश्न का उत्तर जान कर इतना प्रसन्न न हो जाएं कि प्रयास करना ही छोड़ दें। ईश्वर का नाम लेकर प्रयास जारी रखें।

चौपाई 08: बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सनमुख धरि काहु न धीरा।।  

प्रश्न का फल: कार्य पूरा होने में संदेह है।

मार्गदर्शन: प्रयास करना अच्छा है। किन्तु कार्य के पीछे पड़ कर अपना समय व्यर्थ न गवाएं।

चौपाई 09: सुफल मनोरथ होहु तुम्हारे। राम लखन सुनि भए सुखारे।।

प्रश्न का फल: प्रश्न फल उत्तम है। कार्य सिद्ध  होगा।

मार्गदर्शन: प्रश्न का उत्तर जान कर इतना प्रसन्न न हो जाएं कि प्रयास करना ही छोड़ दें। ईश्वर का नाम लेकर प्रयास जारी रखें।

 

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मैं समूह हूँ ऐसे मित्रों का जो महत्वकांशी तो हैं किन्तु जिनकी महत्वाकंशाएं हैं कि वे इतना योग्य बन सकें कि दूसरों का अधिक से अधिक भला कर सकें। ये ऐसे मित्र हैं जो सबको स्वास्थ्य प्रदान करने वाला Web TV Channel खोलना चाहते हैं। मेरी आयु, मेरी वृद्धि और मेरा विकास इन्हीं के परिश्रम पर निर्भर करता है।