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आसन करते समय हमें शरीर को एक स्थिति में लाकर सांस को रोकना होता है।

योगासन क्या है, इसकी परिभाषा का विस्तार इसी बात से जान लें कि कुल 84 लाख आसन माने गए हैं। योग शास्त्रों की परंपरा अनुसार योगासनों की इतनी गिनती है। किन्तु हम इनमें से बहुत ही कम आसनों के बारे में जानते हैं।

योगासन की परिभाषा (definition of yogasana)

आसन, योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। आसन का अर्थ है मन को शांत करके शरीर को सुखमय स्थिति में रखना। दूसरे शब्दों में सुख पूर्वक, बिना कष्ट के, एक ही स्थिति में अधिक से अधिक समय तक रहना ही आसन है।

कुल हैं 84 लाख आसन (total 840,000 yoga postures or aasanas)

योगासन क्या है और योगासन कितने हैं, इसका उत्तर अधिकतर लोग नहीं दे पाते। हमारे ऋषि-मुनियों एवं योग शास्त्रों की परंपरा के अनुसार कुल 84 लाख आसन है। यह सभी आसन विभिन्न जीव जंतुओं के नाम से पहचाने जाते हैं। हम इनमें से बहुत ही कम आसनों के बारे में जानते हैं। इनमें से मात्र 84 आसन ही ऐसे हैं जिन्हें प्रमुख माना गया है। उनमें से भी वर्तमान में मात्र 20 आसन ही प्रसिद्ध हैं जिन्हें लोग आसानी से कर लेते है।

यहाँ जानें: क्या हैं योगमुद्रासन का परिचय एवं लाभ

योग गुरु बाबा रामदेव जिन्होंने पूरे विश्व को बताया कि योगासन क्या है, उनके अनुसार इन सभी आसनों का अभ्यास शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वास्थ्य लाभ तन-मन एवं उपचार के लिए किया जाता है।

2 प्रकार के आसन (2 types of aasanas)

इन आसनों को करने के तरीके के आधार पर इन्हें 2 वर्गों में बांटा गया है।

1. गतिशील आसन

2. स्थिर आसन

1. गतिशील आसन

गतिशील आसन वे आसन हैं जिनमें शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है।

2. स्थिर आसन

स्थिर आसन वह आसन है जिनमें अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है। आसन का अभ्यास करते समय स्थिति के समय और सीमा को धीरे धीरे बढाया जाता है।

प्रत्येक आसन का अलग स्वास्थ्य लाभ होता है। अलग अलग रोगों से मुक्ति पाने के लिए भी अलग अलग आसन बताये गए हैं। विभिन्न आसन शरीर के विभिन्न हिस्सों पर प्रभाव डालते हैं। इनका पूरा लाभ लेने के लिए आवश्यक है की आप योगासन किसी प्रशिक्षित योग ट्रेनर की देख रेख में ही योगासनों का अभ्यास करें।

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आसन में चक्रों पर ध्यान (meditaion on chakras)

कोई भी आसन करते समय आपको अलग-अलग निर्धारित चक्रों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। किसी एक आसन में किसी एक चक्र पर अपना ध्यान केंद्रित करना होता है। इससे वो आसन शरीर के किन्हीं खास अंगों पर ही विशेष प्रभाव डालता है। जैसे भुजंगासन करते समय आपको विशुद्धि चक्र पर ध्यान देना होता है।

आसन करते समय मंत्र (mantra chanting while yogasana)

योगासन करते समय मंत्रोच्चार के विषय में बहुत कम ही लोग जानते हैं। कई आसन ऐसे हैं जिन्हें करते समय कुछ विशेष मन्त्रों का उच्चारण भी करना होता है। जिस प्रकार आपने देखा होगा कि सूर्यनमस्कार में विभिन्न विशेष मन्त्रों का उच्चारण किया जाता है।

आसन करते समय करने होते हैं 2 तरह के कुम्भक ( 2 types of kumbhak while doing yoga aasanas)

अधिकतर आसन ऐसे हैं जिनमें हमें सांस रोकनी होती है। आसन करते समय हमें शरीर को एक स्थिति में लाकर सांस को रोकना होता है। इसी सांस रोकने की प्रक्रिया को ही कुम्भक कहते हैं। यदि सांस बाहर छोड़ कर रोकी जाये तो इसे बाह्य कुम्भक कहते हैं, किन्तु यदि सांस अंदर खींच कर रोकी जाये तो इसे आभ्यान्तर कुम्भक कहा जाता है। इसके अलावा योग में ऐसे आसन भी मौजूद हैं जिनमें आप एक स्थिति में आकर सांस लेते रह सकते हैं।

योगासन क्या है, इस विषय पर यदि आपके पास भी कोई जानकारी है तो कृपया नीचे कमेंट में उस जानकारी को दूसरों के साथ शेयर करें। योग से जुड़ी विचित्र जानकारियां हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। यदि आप किसी विषय पर कोई जांनकारी चाहते हैं तो कमेंट में लिख दें। हम प्रयास करेंगे कि आपके प्रश्न का उत्तर अवश्य दें।

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