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रेकी जैसी अलौकिक शक्तियाँ ऋषियों के पास भी थी

क्या रेकी जैसी आलौकिक शक्तियाँ ऋषि-मुनियों के पास भी थी?

रेकी एक ऐसी चिकित्सा पद्वति है जो कि प्रारम्भ से ही कई कई प्रकार के रोगों का निदान करने में सफल रही है। ऐसी आलौकिक शक्तियाँ (Supernatural Powers) ऋषि-मुनियों के पास भी थीं। वे इन शक्तियों का प्रयोग मानव कल्याण के लिए करते थे। ये अलौकिक शक्तियां पीढ़ी दर पीढ़ी उनके वंशजों को मिलती रहीं। जैसे जैसे इन शक्तियों से जुड़ा ज्ञान आगे पीढ़ियों में वितरित होता रहा, ये ज्ञान कम भी होता चला गया। अब यहाँ एक सवाल सामने आते हैं कि, “क्या वे सभी चमत्कारिक आलौकिक शक्तियां आज भी हमारे आस पास कहीं विद्यमान हैं?”

हम अपने आधुनिक जीवन की दौड़ भाग में उसे भूल चुके हैं। हम भूल चुके हैं कि हमारे भीतर कुछ आलौकिक शक्तियां और देवी क्षमताएं विद्यमान हैं। वैसे तो हम इन शक्तियों को भूल चुके हैं लेकिन फिर भी ये अक्सर हमारे दैनिक जीवन में अपना असर दिखते हैं, बस हम उन्हें पहचान ही नहीं पाते। हमारे भीतर विद्यमान इन्हीं शक्तियों के कारण ही हमें कई बार प्रकार के पूर्वाभास होते हैं।

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ऐसे होते हैं पूर्वाभास

  • हमें अहसास होता है कि कोई ख़ास शख़्स आने वाला है और वो सच में आ जाता है।
  • हम किसी के बारे में सोच रहे होते हैं और उसी का फ़ोन आ जाता है।
  • आपके फ़ोन की घण्टी बजती है, और आप बिना देखे ही बोल देते हैं कि फलां फलां बन्दे का फ़ोन है, और फ़ोन उसी का होता है।

इस तरह के कई विचित्र उदाहरण हमें अपने आसपास बड़ी आसानी से मिल सकते हैं। टेलिपैथी (Telepathy), सम्मोहन (Hypnotism) रेकी (Reiki) इत्यादि इसी तरह की शक्तियों के ही उदाहरण हैं।

जन्म से होती हैं हमारे भीतर

रेकी में मात्र उन्हीं आलौकिक शक्तियों (cosmin energy) के विषय में बताया जाता है जो जन्म से ही हमारे भीतर थीं। लेकिन ये शक्तियां हमारे भीतर सुप्तावस्था में मौजूद होती हैं। इन्हें प्रयोग करने के लिए इन्हें पहले जागृत करना पड़ता है। रेकी सिखाते समय इन्हीं शक्तियों को जागृत एवं प्रयोग करना सिखाया जाता है।

हमारे भीतर विभिन्न प्रकार की रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। जैसे कि किसी व्यक्ति को यदि चोट लग जाये तो बिना दवाई खाये या लगाए भी अपने आप ठीक हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे वाइटल पावर (Vital Power) कहा जाता है।

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कब प्रवेश करती है ये ऊर्जा हमारे शरीर में?

वैसे तो ये ऊर्जा सारा दिन ही हमारे शरीर में प्रवेश करती रहती है किन्तु जब हम सो रहे होते हैं तो हमारा शरीर ब्रह्माण्ड से इस प्राण ऊर्जा को थोड़ा ज़्यादा ग्रहण करता है, और हम स्वस्थ होते है। दिन भर की हमारी थकान उसी समय दूर होती है। हमारी टूटी फूटी कोशिकायों की उसी समय मरम्मत होती है। किन्तु सोते समय भी यह ऊर्जा हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में प्रवेश नहीं कर पाती।

इससे हमारा शरीर चलता फिरता तो रहता है, छोटी मोटी चोटें या दोष भी दूर होते रहते हैं। लेकिन हमें आवश्यकता है अधिक ऊर्जा की। रेकी में इसी ऊर्जा को बड़े स्तर पर ग्रहण करना और प्रयोग करना सिखाया जाता है। इसे सीखने के बात व्यक्ति रेकी चिकित्सक (Reiki Healer) बन जाता है और फिर इस प्राण ऊर्जा को अपने शरीर से दूसरे के शरीर में भेज कर उसके रोग भी दूर कर सकता है। फिर वो समस्या चाहे शारीरिक हो, मानसिक हो या फिर आत्मिक। ये रेकी प्राण ऊर्जा उस समस्या को हल कर देती है।

रेकी का प्रभाव

अब इसका निष्कर्ष हम ये निकाल सकते हैं कि रेकी चिकित्सक, ब्रह्माण्ड से रेकी ऊर्जा को अपने शरीर में प्रवेश कराता है। फिर उसे एकत्र करता है और फिर इस ऊर्जा से रोगी व्यक्ति के रोगी हिस्से पर प्रभाव डाल कर उसे ठीक कर देता है। ऐसा माना जाता है कि ऐसी आलौकिक शक्तियाँ (Supernatural Powers) ऋषि-मुनियों के पास भी थीं। वह रोग या समस्या जो खुद ब खुद तीन हफ्ते में ठीक होने वाली थी, इस ऊर्जा के प्रभाव से 3-4 दिन में ही ठीक हो जाती है। यही रेकी है।

(नोट: ये लेख ‘रेकी हीलर विकास दुग्गल’ के साथ हुई बातचीत पर आधारित है।) 

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