ध्यान की परिभाषा :

‘ध्यान’ एक प्रकार की अवस्था या क्रिया है, जिसमें मानव अपने मन की साधारण अवस्था से निकलकर अपने चेतन-मन को एक अलग अवस्था में (जहाँ जाकर उसे एक अलग तरह की शांति एवं सुख का अनुभव हो) ले जाए। यह अवस्था ही ‘ध्यान’ कहलाती है। ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम अपने जीवित शरीर को एक ऐसी अवस्था में ले जाते हैं जहाँ से हमें अपनी आन्तरिक शक्ति के होने का एहसास हो जाता है। इस क्रिया या अवस्था में प्रवेश     करते समय मनुष्य को अपने आस-पास कुछ अदृश्य तरंगों या हमारी जीवन शक्ति से जुड़ी ऊर्जा के सजग तरीके से प्रवाह होने का अहसास होता है।

ध्यान का शाब्दिक अर्थ

ध्यान का शाब्दिक अर्थ होता है किसी का ‘स्मरण’ करना या किसी एक जगह पर अपनी ऊर्जा को केंद्रित करना। साधारण भाषा में कहें तो जैसे हमें एक जगह पर बैठे-बैठे किसी दूसरी जगह या व्यक्ति से जुड़ी किसी बात का ध्यान या स्मरण हो आना, जिससे कि हम प्रभावित हो जाएँ और अपनी वर्तमान अवस्था से हटकर ऐसा अनुभव करें कि हम वहाँ ही पहुँच गए, जहाँ हमें कुछ पलों के लिए सुख का अनुभव हो सके।  

यदि हम प्राचीन मानवकाल में से इस शब्द को ढूँढना शुरू करें तो हमें ज्ञात होगा कि ध्यान को ‘ईश्वर-भक्ति’ का भी एक उत्तम साधन माना गया है। अपने इष्ट देव के ध्यान में मग्न होकर शांत-चित अवस्था में बैठ जाना भी ध्यान ही कहलाता है। ध्यान की कई प्रकार की अवस्थाओं का वर्णन हमारे धर्म-ग्रंथों में किया गया है। वैसे तो विश्वभर के बहुत सारे महापुरुषों ने इस विषय पर अपने विचार दिए हैं, लेकिन हमारे भारत देश में इस विषय पर ‘बौध-मत’ के संस्थापक ‘भगवान् गौतम बुद्ध’ द्वारा दिए गए ध्यान सूत्र की शैलियों को आज भी अपनाया जा रहा है। इन ध्यान सूत्रों को अपनाकर मनुष्य कई प्रकार की समस्याओं से सदा के लिए निजात पाकर सदैव सुखमय जीवन व्यतीत कर सकता है।

इस शब्द ध्यान की परिभाषा को शब्दों में बयान करना वैसा ही है जैसे रेत में से सुई को तलाशना। लेकिन फिर भी हम कोशिश करेंगे कि इस विषय में आपको और अधिक जानकारी दे सकें. हम आपको इस विषय में और भी अधिक जानकारी देने का प्रयास करते रहेंगे।

यदि आपके पास भी इस विषय में कुछ अन्य जानकारी या सुझाव है तो हमें अवश्य लिखें.  धन्यवाद

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भारतीय युद्ध कलाओं में मेरी रुचि शुरू से ही काफी रही है। घर की दीवार पर टंगा नॉनचक मुझे हमेशा चिढ़ाता रहता है। अलग अलग मार्शल आर्ट्स के बारे में जानने की ललक मुझमें हमेशा से ही रही। कई अलग अलग मार्शल आर्ट्स के बारे में मैं अक्सर रिसर्च करता रहता हूँ। जब भी कुछ नया सामने आता है तो कोशिश करता हूँ कि उसे एक लेख के रूप में पिरो कर आपके सामने रखूँ। इसमें युद्ध कलाओं की अधिकता होती है लेकिन इसके अलावा भी अगर मुझे कुछ लिखने का मौका मिले तो मैं चूकता नहीं।