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तेज़ और असहनीय दर्द का कारण सिर्फ कोई शारीरिक चोट ही नहीं बल्कि आपका मानसिक तनाव या कोई भावनात्मक समस्या भी हो सकती है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. सुसान बबेल (Dr. Susan Babel , Psychologist) के अनुसार, “आपकी भावनाएँ आपके पुराने दर्द को प्रभावित करती हैं।”

तेज़ और असहनीय दर्द का कारण सिर्फ कोई शारीरिक चोट ही नहीं बल्कि आपका मानसिक तनाव या कोई भावनात्मक समस्या भी हो सकती है। 

मनोवैज्ञानिक डॉ. सुसान बबेल (Dr. Susan Babel , Psychologist) के अनुसार, “आपकी भावनाएँ आपके पुराने दर्द को प्रभावित करती हैं। उनका कहना है कि आपको होने वाली कोई शारीरिक पीड़ा आपके किसी बुरे विचार के कारण भी हो सकती है।”

हमारे अलग अलग विचार या भावनाएं हमारे शरीर के अलग अलग भागों में अलग अलग प्रकार के दर्द पैदा कर देती हैं। यदि हम इसे समझ लें तो उन सभी पीड़ाओं से मुक्ति पाना हमारे लिए सरल हो जायेगा। 

1. सिरदर्द (headache):

सिरदर्द (headache) आपके तनाव भरी जीवन शैली के कारण हो सकता है। यदि किसी को अत्यधिक तीव्र सिरदर्द होता है तो इसका उपाय करें। अपने लिए थोड़ा समय अवश्य निकालें। योग, प्राणायाम एवं निश्चिन्त होकर आराम करने से भी सिरदर्द (headache) में आराम मिलेगा। 

2. गर्दन में दर्द (neck pain):

आपकी गर्दन में दर्द का कारण (cause of neck pain) ये भी हो सकता है कि आपको किसी को क्षमा करने की आवश्यकता है अर्थात आप किसी को किसी बात के लिए दोषी मान कर उसके लिए अपने मन में कभी माफ़ न करने की भावना लिए बैठे हैं। किन्तु जिसे आपको माफ़ कर देना चाहिए वो आप स्वयं भी हो सकते हैं। इसका उपाय ये है कि अब आप सभी को माफ़ करते हुए अपने भीतर मौजूद उन खूबियों पर ध्यान केंद्रित करें जो आपको या दूसरों को पसंद हैं। 

3. कंधे में दर्द (shoulder pain): 

कंधे में दर्द का कारण ये भी हो सकता है कि व्यक्ति एक भारी भावनात्मक बोझ ढो रहा है। कंधे सब कुछ ढोते हैं। इसका उपाय ये है कि अपने इस दर्द को दूर करने के लिए अपने मित्रों या परिवार के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों एवं उनसे जुडी भावनाओं को सांझा करें। 

4. पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द (pain in upper back):

पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द का कारण (cause of pain in upper back) ये भी हो सकता है कि आपको भावनात्मक रूप से किसी के साथ की ज़रुरत है। संभवत: या तो आप अपनी भावनाओं को दबाए रखते हैं या फिर आपको ऐसा महसूस होता है कि किसी भी कार्य के लिए कोई आपकी सराहना नहीं करता। इसका उपाय ये है कि आप अपने मन में छिपी अपनी भावनाओं के बारे में अपने साथी या अपने किसी अच्छे मित्र से बात करें। 

5. पीठ के निचले हिस्से में दर्द (lower back pain):

पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण (cuase of lower back pain) ये भी हो सकता है कि व्यक्ति को वित्तीय चिंता है। इसका उपाय ये है कि आप आराम से बैठ जाएं और पैसे के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करें। विचार करें कि कहाँ पैसे खर्च करने हैं और कहाँ नहीं। 

6. कोहनी और बाज़ू में दर्द (pain in elbow and arm): 

कोहनी और बाज़ू का दर्द लचीलेपन की कमी को दर्शाता है अर्थात आप किसी भी नए परिवर्तन को शीघ्रता से स्वीकार नहीं कर पाते। इसका उपाय ये है कि आप प्रयास करें कि अपने जीवन में प्राकृतिक रूप से होने वाले परिवर्तनों का विरोध न करें।

7. हाथ में दर्द (pain in hand): 

दोस्तों की कमी के कारण हाथों में दर्द हो सकता है। इसका उपाय ये है कि आप नए लोगों से मिलने और नए मित्र बनाने की कोशिश करें।

8. कूल्हों में दर्द (pain in hips):

बदलाव का डर कूल्हों में दर्द की वजह बन सकता है। किसी बड़े फैसले पर आगे बढ़ना या उसका इंतजार करने के कारण भी कूल्हों में दर्द हो सकता है। इसका उपाय ये है कि आप परिवर्तन से न डरें एवं होने वाले बड़े परिवर्तन पर धीरे धीरे आगे बढ़ें। 

9. घुटनों में दर्द (pain in knees):

घुटनों का दर्द अत्यधिक स्वाभिमान या घमण्ड का संकेत है। इसका उपाय ये है कि आप कहीं सेवा का कार्य करें और याद रखें कि कोई भी परिपूर्ण या पूरी तरह से दोष रहित नहीं होता।

10. पिंडलियों में दर्द (pain in calves):

पिंडलियों के दर्द का कारण मानसिक या भावनात्मक तनाव हो सकता है। ईर्ष्या के कारण भी पिंडलियों में दर्द होता है। इसका उपाय ये है कि आप इसी समय आप ईर्ष्या से मुक्ति पा लें, साथ ही प्रयास करके तनाव को भी दूर करें।

11. टखनों में दर्द (pain in ankles):

टखने में दर्द का मतलब है कि आपको अपने जीवन में अधिक आनंद की आवश्यकता है। इसका उपाय ये है कि आप अपने जीवन में छोटी चीजों और हर पल का आनंद लेने की कोशिश करें।

12. पैरों में दर्द (pain in feet):

यदि आपको अवसाद की समस्या है तो आपके पैरों में दर्द हो सकता है। अवसाद एक विशिष्ट रोग है, यदि आप इस प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं तो कोई एक नया शौक खोजने की कोशिश करें या फिर कोई पालतू जानवर रख लें।

हमारे विचारों एवं हमारी भावनाओं का शरीर पर होने वाला प्रभाव तथा इनसे पैदा होने वाली समस्याएं वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी हैं। इस प्रकार के दर्द से पीड़ित होने पर डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ समय इन बातों पर ध्यान देकर देखें, असर अवश्य दिखाई देगा। भावनाओं और शारीरिक समस्याओं के बीच यह संबंध ही EFT (Emotional Freedom Techniques) है।

यह लेख रेकी हीलर श्रीमती कामिनी मेहंदीरत्ता जी ने लिखा है वे एक निपुण हीलर हैं और अब तक कई रोगियों को ठीक कर चुकी हैं।