ये हैं अदभुत प्राचीन भारतीय युद्ध कलाएं

प्राचीन भारतीय युद्ध कलाएं (Martial arts of ancient India) पूरे भारत भर में फैली हुई हैं। अलग-अलग कई ऐसी युद्ध एवं द्वंद्व कलाएं हैं, जिनके विषय में बहुत कम ही लोग जानते हैं। आइये हम आपको बतातें हैं, कि कौन सी हैं वे अदभुत प्राचीन भारतीय युद्ध कलाएं (Martial arts of ancient India)। अलग-अलग क्षेत्रों में, राज्यों में अलग अलग युद्ध एवं द्वंद्व कलाएं हमें नज़र आईं। इन कलाओं में कई तो ऐसी हैं जो भारत से ही बाहर के देशों में गई और प्रचलित हुईं। हमने कई ऐसी युद्ध एवं द्वंद्व कलाओं के विषय में जानकारी एकत्र की।

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अभी तक की अपनी खोज में हमने ये पाया है कि भारत में विभिन्न प्रकार की लगभग 17 युद्ध कलाएं एवं द्वन्द्व कलाएं विद्यमान हैं। ये देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग अलग विशेषताओं और नाम के साथ पायी जाती हैं।

ये हैं प्राचीन भारतीय युद्ध कलाएं (Martial arts of ancient India)

  1. अदिथाडा (Adithada)
  2. बोथाटी (Bothati)
  3. गतका (Gatka)
  4. इनबुआन द्वंद्व (Inbuan Wrestling)
  5. कल्लारिपयट्टु (Kalaripayattu)
  6. कुट्टू वरिसाई (Kuttu Varisai)
  7. लाठी (Lathi)
  8. मल्ल युद्ध (Mall Yudh)
  9. मलयुथम (Malyutham)
  10. मुकना (Mukna)
  11. नियुद्ध क्रीडे (Niyudh Kride)
  12. पहलवानी (Pehalwani)
  13. सरित सरक (Sarit Sarak)
  14. सिलम्बम (Silambam)
  15. थांग ता (Thang Ta)
  16. वरमा कलई (Varma Kalai)
  17. वज्र मुष्टि (Vajra Mushti)

यहाँ पढ़ें: युद्ध कलाओं के जन्म और विकास की वास्तविक कहानी

अदिथाडा (Adithada)

ये कला तमिलनाडु और उत्तरी श्रीलंका में पाई जाती है। ये किक-बॉक्सिंग की तरह लड़ी जाती है।

बोथाटी (Bothati)

बोथाटी एक 10 फ़ीट लम्बे भाले को कहा जाता है। जिसे मराठे प्रयोग किया करते थे। बोथाटी वास्तव में एक खेल है जो युद्ध के अभ्यास का एक हिस्सा है।

गतका (Gatka)

ये युद्ध कला पंजाब के इतिहास के साथ बड़े गहरे से जुड़ी हुई है।

इनबुआन द्वंद्व (Inbuan Wrestling)

ये मिज़ोरम की एक द्वंद्व कला है, जिसका जन्म 1750 में हुआ माना जाता है।

कल्लारिपयट्टु (Kalaripayattu)

केरल कि ये युद्धकला विश्वप्रसिद्ध है, इसके भीतर ही कई अलग अलग शाखाएं हैं। इसे कई युद्ध कलाओं की जन्मदाता भी कहा जाता है।

कुट्टू वरिसाई (Kuttu Varisai)

कुट्टू वरिसाई दक्षिण भारतीय युद्ध कला सिलम्बम का ही एक भाग है। इसमें अपने हाथों और पैरों को ही शास्त्रों की तरह प्रयोग किया जाता है।

लाठी (Lathi) 

लाठी एक ऐसी लड़ाई की कला है जो देखने में तो साधारण सी लगती है किन्तु बड़े बड़े योद्धाओं को धराशाई करने की क्षमता रखती है। इसमें 6 से 8 फ़ीट तक के बांस का प्रयोग किया जाता है। उत्तर भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में ये काफी प्रचलित है।

मल्लयुद्ध (Mallyudh)

मल्लयुद्ध एक द्वंद्व कला है जिसमें 2 लोग आपस में निहत्थे यानि बिना शास्त्रों के लड़ते हैं। ये काफी प्राचीन कला है जो आज भी मौजूद है।

मलयुथम (Mallyutham) 

मलयुथम मल्लयुद्ध से अलग है। मलयुथम एवं मल्लयुद्ध के अभ्यास के तरीके भी अलग है। तमिलनाडु की ये द्वंद्व कला चेर, चोल एवं पांडियन वंश के समय में काफी पाली पढ़ी थी।

मुकना (Mukna) 

मुकना एक मणिपुरी द्वंद्व कला है। ये आजकल भी एक खेल के रूप में खेली जाती है। ये जूडो और मल्लयुद्ध का मेल कही जा सकती है।  

नियुद्ध क्रीडे (Niyuddha Kride)

नियुद्ध क्रीड़े दक्षिण भारत से सम्बन्ध रखती है। इसे कलारिपयात्तु से जोड़ कर देखा जाता है। इसमें बिना शस्त्रों के ही शत्रु को धराशाई किया जा सकता है। इसके जनक भगवान शिव को माना जाता है।

पहलवानी (Pehalwani)

पहलवानी पूरी तरह से भारतीय नहीं कही जा सकती। मुगलों के समय में ये मल्ल्युद्ध एवं पर्सियन द्वंद्व कला वर्ज़िश-ए-बस्तानी को मिल कर बनी थी। पहलवान और कुश्ती शब्द भी पर्शियन भाषा के ही हैं।

सरित सरक (Sarit Sarak)

सरित सरक निहत्थे ही लड़ने की कला है। ये मणिपुर की एक आत्मरक्षा की कला है। वास्तव में ये थांग ता युद्ध कला के साथ ही सीखी जाती है।

सिलम्बम (Silambam) 

सिलम्बम के युद्ध कला के लगभग 1000 साल पुराने होने के प्रमाण मिलते हैं। ये हथियारों से लड़ने की कला है। किन्तु इसके शस्त्र दूसरी कलाओं से बहुत भिन्न हैं।

सनातन शस्त्र विद्या (Sanatan Shastra Vidya)

सनातन शस्त्र विद्या विद्या अति प्राचीन युद्ध कला मानी जाती है। इस युद्ध कला में कई वैदिक काल से जुड़े शस्त्रों एवं कलाओं का वर्णन मिलता है। इसमें वर्णन है कि किस प्रकार शस्त्रों के साथ एक अकेला व्यक्ति एक से अधिक योद्धाओं से लड़ सकता है।

स्के (Squay)

स्के एक प्राचीन भारतीय युद्ध कला है जो कश्मीर से जुड़ी हुई है। प्राचीन काल में इसमें लड़ने के लिए तलवारों का प्रयोग होता था। इसमें बिना शस्त्रों के लड़ना भी शामिल था। ये आज खेल के रूप में खेली जाती है।

थांग ता या हुयेन लल्लोंग (Thang Ta or Huyen Lallong)

ये कला मणिपुर से सम्बन्ध रखती है। यहां इस कला के विषय में ये स्पष्ट करना आवश्यक है कि थांग ता एवं हुयेन लल्लोंग एक ही कला नहीं हैं अपितु थांग ता युद्ध कला, हुयेन लल्लोंग का एक भाग है। हुयेन लल्लोंग के 2 भाग हैं एक है थांग ता जिसमें शस्त्रों के साथ युद्ध किया जाता है तथा एक है सरित सरक जिसमें बिना शस्त्रों के युद्ध किया जाता है।   

ठोडा (Thoda) 

ठोडा हिमाचल प्रदेश की लड़ने की कला है। ये एक धनुर्विद्या है। इसका सम्बन्ध पांडवों से भी माना जाता है। आज के समय में ये मात्र एक पारम्परिक खेल के रूप में ही शेष बची है।

वरमा कलई (Varma Kalai)

वरमा कलाई अर्थात मर्म कला तमिलनाडु से सम्बन्ध रखती है। ये शरीर के मर्म बिंदुओं को छूकर या बिना छुए प्रभावित करने की कला है। इसमें शरीर के मर्म बिंदुओं पर प्रहार करके किसी के प्राण लिए भी जा सकते हैं तथा उन्हीं मर्म बिंदुओं को विभिन्न प्रकार से प्रभावित करके रोगी को ठीक भी किया जा सकता है।

वज्र मुष्टि (Vajra Mushti) 

ये प्राचीन द्वंद्व कला भी दक्षिण भारत से सम्बन्ध रखती है। इसमें हाथी दांत या भैंस के सींगों से बनी मुष्टिका पहन कर लड़ा जाता है। इसका वर्णन चालुक्य वंश के राजा सोमेश्वर तृतीया द्वारा लिखित पुस्तक अभिलषितार्थ चिंतामणि में भी मिलता है।

प्राचीन भारतीय युद्ध कलाएं (Martial arts of ancient India) यदि चर्चा का विषय हों तो सर्वाधिक चर्चा दक्षिण भारतीय युद्ध कलाओं (South Indian Martial Arts) की होगी। ये सभी युद्ध एवं द्वंद्व कलाएं भारत के विभिन्न राज्यों में पायी जाती हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्द है कल्लारिपयट्टु (Kalaripayattu) जो केरल में पायी जाती है। इसे अब तक कि सबसे पुरानी युद्ध कला माना जाता है। ऐसे ही कुट्टू वरिसाई (Kuttu Varisai), सरित सरक (Sarit Sarak), सिलम्बम (Silambam) और वरमा कलई (Varma Kalai) भी दक्षिण भारत से सम्बन्ध रखती हैं।

थांग ता (Thang Ta) उत्तर पूर्व भारत की कला है। इसमें तलवारों का बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ प्रयोग किया जाता है। गतका (Gatka) जो कि पंजाब से सम्बन्ध रखने वाली युद्ध कला है उसी की तरह थांग ता में भी आँखों पर पट्टी बाँध कर सामने वाले पर वार करके दिखाया जाता है। इसके अलावा और भी ऐसी कई कलाएं हैं जिनके विषय में हम आपको और जानकारी एकत्र करके बताएंगे। हिमाचल की एक कला है थोडा (Thoda) ये एक प्रकार की धनुर्विद्या है।

ऐसी ही कई कलाएं भारत भर में बिखरी पड़ी हैं जिन्हें आपके सामने लाना ही हमारा उद्देश्य है। ताकि वे कलाएं गुमनाम होते होते समाप्त न हो जाएं।

यहाँ पढ़ें: हमारा ब्लॉग

यहाँ पढ़ें: प्राचीन भारतीय युद्ध कला ‘गतका’ का इतिहास

 

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मैं समूह हूँ ऐसे मित्रों का जो महत्वकांशी तो हैं किन्तु जिनकी महत्वाकंशाएं हैं कि वे इतना योग्य बन सकें कि दूसरों का अधिक से अधिक भला कर सकें। ये ऐसे मित्र हैं जो सबको स्वास्थ्य प्रदान करने वाला Web TV Channel खोलना चाहते हैं। मेरी आयु, मेरी वृद्धि और मेरा विकास इन्हीं के परिश्रम पर निर्भर करता है।

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