इसलिए मनाई जाती है महाशिवरात्रि

    महाशिवरात्रि, एक ऐसा दिन जब मंदिरों में शिवलिंग बेलपत्रों, फल और फूलों से पूरी तरह छिप से जाते हैं। उनके दर्शन करने या उन पर जल अर्पित करने के लिए भी परिश्रम करना पड़ता है। मंदिरों का वातावरण अत्यंत पवित्र, शुभ एवं सुखमय सा हो जाता है। इस दिन शिवलिंग पर शुद्ध मन से एक बार जल चढाने मात्र से ही ऐसा प्रतीत होने लगता है कि हमारे सारे कष्ट कट गए हैं। फाल्गुन मास में कृष्ण चतुर्दशी का ये पवित्र दिन ही है महाशिवरात्रि

    क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि

    शिवपुराण के अनुसार इसी दिन सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी। दूसरे शब्दों में इसी दिन परमपिता परमात्मा शिव ने सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ किया था।

    भगवान शिव का विवाह मां पार्वती से भी इसी दिन हुआ था। इसीलिए कई स्थानों पर मंदिरों में भगवान शिव की बारात निकाली जाती है एवं माँ पार्वती के साथ उनके विवाह का उत्सव भी मनाया जाता है।  

    महाशिवरात्रि से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रचलित है। एक बार माँ पार्वती के मन में ये प्रश्न उत्पन्न हुआ कि सरलता से प्रसन्न होने वाले देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए क्या कोई व्रत भी है। तो माँ पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किया कि हे प्रभु आपकी कृपा सरलता से पाने के लिए पृथ्वीलोक के प्राणियों को कौन सा व्रत अथवा पूजन करना चाहिए। मां पार्वती का प्रश्न सुनकर भोलेनाथ जी ने सभी संकट हरने वाले महाशिवरात्रि व्रत के विषय में बताया। महादेव मुस्कुराकर मन प्रसन्न करने वाली वाणी बोले, “जो भी भक्त इस महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान पूर्वक मेरी पूजा-अर्चना करेगा। वह दु:ख व परेशानियों से मुक्त होकर सुखमय जीवन व्यतीत करेगा।” तभी से इस व्रत को करने की शुरुआत हो गई और आज तक चलती आ रही है।

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