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courtesy to: wildernesswanderings. dot org इनबुआन द्वन्द्व कला (inbuan wrestling) भारत के मिज़ोरम प्रदेश से जुड़ी एक प्राचीन द्वन्द्व कला है।

इन्बुआन द्वन्द्व कला

(एक प्राचीन खेल जिसके आज भी होते हैं मैच)

inbuan wrestling के विषय में बात करने से पहले martial art के बारे में थोडा बात कर लें।

mma यानि कि mix marshal arts fighting में विश्व के कई martial arts मौजूद हैं। इन्हें हम हिंदी में युद्ध कलाएँ या मल्ल युद्ध कलाएँ भी कह सकते हैं। मात्र एशिया में ही कई प्रकार की द्वंद्व कलाएँ (hand to hand combat) मौजूद हैं। ऐसा की इन युद्ध कलाओं की अपनी एक दुनिया है। इसे हम युद्ध कलाओं का एशियाई विश्व (asian world of martial arts) कह सकते हैं। एशियाई देशों की कई युद्ध कलाएँ या द्वंद्व कलाएँ तो एक दूसरे से बिलकुल अलग हैं। कई अलग अलग तरह के मार्शल आर्ट (different kinds of martial arts) यहाँ आपको देखने को मिल जायेंगे। इनमें से कई तो अति प्राचीन हैं। उनका अपना इतिहास है। लेकिन एक द्वंद्व खेल (combat sports) की तरह अभी भी खेले जाते हैं। यूट्यूब (youtube) पर आपको कई तरह की युद्ध कलाओं (different forms of martial arts) के वीडियो भी मिल जायेंगे।

भारत में भी कई अलग अलग क्षेत्रों में आपको अलग अलग युद्ध कलाएँ मिल जायेंगी। जिन्हें शुद्ध तौर पर भारतीय युद्ध कलाएँ (indian martial arts) कहा जा सकता है। इन युद्ध कलाओं का सम्बन्ध काफी पुराने इतिहास से रहा है। इसलिए ये अति प्राचीन भारतीय युद्ध कलाएं (ancient indian martial arts) कही जा सकती हैं। अधिकतर लोग मात्र कलारीपयाट्टू (kalaripayattu) का ही नाम जानते हैं। किन्तु कलारीपयाट्टू (kalaripayattu) के अलावा और भी कई युद्ध एवं द्वंद्व कलाएं मौजूद हैं। इन्हीं में से एक द्वंद्व कला इन्बुआन द्वन्द्व कला (inbuan wrestling) भी है। इसे पूरी तरह से युद्ध कला या द्वंद्व कला नहीं कहा जा सकता।  

क्या है इन्बुआन द्वन्द्व कला (what is inbuan wrestling)

यह खेल 15-16 फ़ीट के व्यास के एक गोले में खेला जाता है। इस गोले में घास या कारपेट होता है। इसमें 2 प्रतिद्वंद्वी होते हैं। जिन्हें एक दूसरे को अपने दोनों हाथों से उठाना होता है। अपने प्रतिद्वंद्वी के पैरों की ज़मीन पर पकड़ ढीली करनी होती है। जो दूसरे को उठा लेता है वो विजेता मान लिया जाता है। इसके लिए उसे अपनी ताक़त, कुशलता और तेज़ी की ज़रुरत होती है। इसमें अपने हाथों पैरों का इस्तेमाल तो करना होता है लेकिन प्रहार नहीं कर सकते। मात्र एक दूसरे को ज़मीन से ऊपर उठाने की ही प्रतियोगिता होती है।

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इन्बुआन द्वन्द्व कला का जन्म एवं विस्तार (birth and spread of inbuan wrestling)

इन्बुआन द्वन्द्व कला (inbuan wrestling) वास्तव में भारत के मिज़ोरम प्रदेश से जुड़ी एक प्राचीन द्वन्द्व कला है। ये कुश्ती या मल्लयुद्ध का ही एक रूप कही जा सकती है। इस कला का जन्म मिज़ोरम के ‘डुंगटलांग’ नामक गाँव में सन 1750 में हुआ था। कहा जाता है कि मिज़ोरम के लोग बहुत मेहनती, साहसी और शिकार करने के शौक़ीन होते थे। उन्हें व्यायाम एवं शारीरिक बल को बनाये रखने का शौक बचपन से ही होता था। मिज़ोरम के युवा अक्सर इस प्रकार की कलाओं को सीखने के शौक़ीन होते थे। ऐसे ही समय में हुआ इस कला का जन्म।

इससे शारीरिक-शक्ति का प्रदर्शन भी होता और खेल प्रतियोगिता भी हो जाती। यह खेल मिज़ोरम का बहुत पुराना खेल है। लेकिन इस कला को प्रसिद्धि तब मिली जब मिज़ोरम के लोगों को ‘लुशाई-हिल्स’ पर स्थानांतरित किया गया। यहाँ यह खेल बहुत बड़े स्तर पर खेला जाने लगा। मिज़ोरम के कई लोगों ने नयी पीढ़ी के युवाओं को इस कला को सीखने के लिए प्रेरित किया। युवाओं ने इस कला को स्वीकार किया और इसका मिज़ोरम में काफी प्रचार एवं प्रसार किया गया।

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शैली एवं नियम (style and rules):

इन्बुआन द्वन्द्व कला (inbuan wrestling) मल्लयुद्ध या कुश्ती की तरह बिना हथियार के खेली जाने वाली कला है। इसको खेलने के नियम बहुत ही सख्त होते हैं। ‘इन्बुआन’ खेल या द्वंद्व कला के नियम कुछ इस प्रकार हैं:-

  1. प्रतियोगिता करते समय खिलाड़ी को लात मारना मना है।
  2. आप अपने प्रतिद्वंद्वी को दायरे (circle) से बाहर नहीं निकाल सकते।
  3. धक्का देना नियम के विरुद्ध होता है।
  4. विशेष तौर पर घुटनों पर झुकना मना होता है। केवल शारीरिक एवं मानसिक नियंत्रण रखकर ही खिलाड़ी को हराना होता है।
  5. इन्बुआन (inbuan wrestling) की प्रतियोगिता घास, नर्म मिट्टी या कारपेट पर की जाती है।
  6. जिस गोले या दायरे में प्रतियोगिता होती है उसका व्यास लगभग 15–16 फीट तक होता है।
  7. एक मैच में 30 से 60 सेकंड के तीन राउंड होते हैं।

यह खेल आज भी बर्मा एवं मिज़ोरम में खेला जाता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि ये खेल बर्मा से ही भारत में आया था। इस खेल से प्रेम करने वाले मिज़ोरम के लोगों के कारण ही ये आज भी फल फूल रहा है।

मित्रों! हम आपको इसी प्रकार भारत से जुड़ी कई प्रकार की युद्ध कलाओं से अवगत कराते रहेंगे। यदि आपके पास भी इस कला से संबंधित कोई अन्य जानकारी या सुझाव है तो हमें अवश्य लिखें। धन्यवाद

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भारतीय युद्ध कलाओं में मेरी रुचि शुरू से ही काफी रही है। घर की दीवार पर टंगा नॉनचक मुझे हमेशा चिढ़ाता रहता है। अलग अलग मार्शल आर्ट्स के बारे में जानने की ललक मुझमें हमेशा से ही रही। कई अलग अलग मार्शल आर्ट्स के बारे में मैं अक्सर रिसर्च करता रहता हूँ। जब भी कुछ नया सामने आता है तो कोशिश करता हूँ कि उसे एक लेख के रूप में पिरो कर आपके सामने रखूँ। इसमें युद्ध कलाओं की अधिकता होती है लेकिन इसके अलावा भी अगर मुझे कुछ लिखने का मौका मिले तो मैं चूकता नहीं।