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अमूल्य साधना की शैली है योग

मित्रो भारत की भूमि पर कई महापुरुषों ने जन्म लिया। इन महापुरुषों ने वर्षों की तपस्या-साधना के पश्चात कई अमूल्य रत्न इस मानवता को समर्पित किये। जिससे कि आने वाले युग-युगान्तरों तक मानव-जीवन को सुखमय बनाया जा सके। ऐसी ही एक साधना-शैली जिसका कि सम्बन्ध मानव जीवन के शारीरिक, मानसिक एवं अध्यात्मिक स्वास्थ्य से है। जिसका नाम है ‘योग साधना’ या जिसे ‘योग’ के नाम से भी जाना जाता है। इस अमूल्य साधना की शैली योग का इतिहास क्या है। आइये इस विषय के बारे में जानते हैं।

योग का प्रारंभिक इतिहास (Early history of yoga)

योग का इतिहास भारत में कई हज़ारों वर्षों पुराना है। इस विषय पर प्राचीन धर्म ग्रन्थ ‘ऋग्वेद’ में कई स्थान पर ‘योगिक क्रियाओं’ के विषय में लिखा गया है। योग की क्रियाएं पुरातन काल में आदिमानव के विकास के साथ ही आरम्भ हो गई मानी जाती हैं। इसके प्रमाण पुरातन गुफाओं में दीवारों पर बनी योग-मुद्राओं की आकृतियों में भी दिखाई पड़ते हैं। यह गुफाएं भारत में हिमालय पर्वत, तमिलनाडु, कर्नाटक और बर्मा के घने जंगलों में पाई गई हैं। इन गुफाओं में भारत के महान ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों, योगियों के साधना के चिन्ह मिलते है। वह चिन्ह आज भी हमें भारत भूमि के स्वर्णिम इतिहास की याद दिलाते हैं।

योगासन क्या है?

योगासन से जुड़े भारत के महान ग्रन्थ (the great books of india associated with yoga)

योगासन का और भी कई ग्रंथों में वर्णन है। जिनमें से ‘महर्षि पतंजली’ द्वारा कृत ‘योगसूत्र’, ‘महर्षि घेरंड’ की ‘घेरंड सहिंता’, गुरु गोरखनाथ जी द्वारा रचित ‘शिव सहिंता’, ‘स्वामी आत्माराम जी’ रचित ‘हठयोग प्रदीपिका’ इसके अलावा भी कई अन्य ग्रन्थ हैं। जिनमें कि ‘योग साधना’ के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। इस योग साधना की जन्मभूमि तो भारत ही है। लेकिन यह धीरे-धीरे पूरे विश्वभर में सदियों से फैलती जा रही है। हज़ारों लोग इस ‘योग साधना’ को अपनाकर शारीरिक, मानसिक एवं अध्यात्मिक रूप से अपने जीवन को सुखमय बना रहे हैं।

भारत के महान योगगुरु (great yoga guru of india)

भारत में इस ‘योग साधना’ को कई भारतीय योग गुरुओं ने सम्पूर्ण विश्व में प्रचार एवं प्रसार का महान कार्य किया। आज भी योग साधना का प्रचार कई महापुरुष कर रहे हैं। ऐसे ही कुछ योगगुरु हैं। जिन्होंने भारतीय योग साधना की विश्व में एक अलग पहचान बनाई। उनके नाम कुछ इस प्रकार से हैं:-

  • श्री तिरुमलाई कृष्णामचार्य जी
  • बी.के.एस.अयंगर जी
  • स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी जी
  • महर्षि महेश योगी जी
  • श्री-श्री रवि शंकर जी
  • योगगुरु बाबा रामदेव जी

इन महापुरुषों ने योग साधना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी पहचान दी है। यह ‘योग-साधना’ आने वाले युगों और युगान्तरों तक भी मानव जीवन को सुखमय बनाती रहेगी।    

योगमुद्रासन की विधि एवं लाभ                          

मित्रों हम आपको इसी प्रकार से योग-साधना एवं योगासन के इतिहास से और भी अधिक जानकारी से अवगत कराते रहेंगे यदि आपके पास भी इस विषय में कुछ अन्य जानकारी या सुझाव है तो हमें अवश्य लिखें धन्यवाद

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भारतीय युद्ध कलाओं में मेरी रुचि शुरू से ही काफी रही है। घर की दीवार पर टंगा नॉनचक मुझे हमेशा चिढ़ाता रहता है। अलग अलग मार्शल आर्ट्स के बारे में जानने की ललक मुझमें हमेशा से ही रही। कई अलग अलग मार्शल आर्ट्स के बारे में मैं अक्सर रिसर्च करता रहता हूँ। जब भी कुछ नया सामने आता है तो कोशिश करता हूँ कि उसे एक लेख के रूप में पिरो कर आपके सामने रखूँ। इसमें युद्ध कलाओं की अधिकता होती है लेकिन इसके अलावा भी अगर मुझे कुछ लिखने का मौका मिले तो मैं चूकता नहीं।