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घर में मंदिर कि स्थापना को यदि नियमानुसार करें तो पूजा के सुफल शीघ्र मिलता है

घर में मंदिर की स्थापना करते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें 

क्या आप घर में ही मंदिर स्थापना का विचार कर रहे हैं?

अधिकतर लोग घर में मंदिर की स्थापना करते समय एक ही बात का ध्यान रखते हैं। घर में जहाँ जगह बच जाये वहीं पर मंदिर स्थापित कर दिया जाये। फिर जहाँ पर घर में सहूलियत हो वहाँ मंदिर बना देते हैं या स्थापित कर देते हैं। कित्नु घर में मंदिर की स्थापना के समय हर सी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

आएये जानते है ये हैं वे छोटी किन्तु अति महत्वपूर्ण बातें, जिसे अपने घर में मंदिर की स्थापना करते समय विशेष ध्यान देना चाहिए।

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1. दिशा का रखें विशेष ध्यान 

घर में मंदिर की स्थापना करते समय ध्यान रखें कि मंदिर ईशान कोण में स्थापित किया जाना चाहिए। अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए। यदि ये संभव न हो तो मंदिर को या तो उत्तर दिशा में स्थापित करें या फिर पूर्व दिशा में स्थापित कर दें । वास्तु की दृष्टि से ऐसा करना ठीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि दिशा विशेष में मंदिर की स्थापना होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह रहता है। क्योंकि रात्रिकाल के अंत से और प्रातः काल के आरम्भ में दिशा विशेष में देवताओं का विचरण होता है। ऐसा करने से देवों की कृपा द्रष्टि भी बनी रहती है।

2. मंदिर का निर्माण करते समय रखें इन बातों का ध्यान 

घर में मंदिर का निर्माण करते समय ये अवश्य ध्यान रखें कि मंदिर शौचालय के साथ या उसके नीचे ना हो। क्योंकि प्राचीन काल में घरों के अन्दर शौचालयों का निर्माण नहीं किया जाता था। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर का वातावरण अशुद्ध हो जाता था। और घर में देव पूजन के लिए इसे शुभ नहीं कहा जाता था। किन्तु आज के इस आधुनिक युग में ऐसा कर पाना संभव नहीं है। लेकिन फिर भी मंदिर और शौचालय को साथ-साथ ना बनायें। घर के डिज़ाइन का नक्शा बनाते समय मंदिर को अलग दिशा में ही बनायें।

3. रसोई घर में कदापि ना बनायें मंदिर 

रसोईघर को शुद्ध माना जाता है, क्योंकि यहाँ पर स्वच्छतापूर्वक भोजन को तैयार किया जाता है। हिन्दुधर्म में तो भोजन को भी देवता के समान माना जाता है। उसको शुद्ध मानकर उसकी पूजा की जाती है। लेकिन फिर भी खाना बनाते समय कई प्रकार की अशुद्धि भी हो ही जाती है। और अशुद्ध वातावरण को देव-पूजा के लिए सही नहीं कहा जाता। वास्तु की दृष्टि से भी यह उचित नहीं होता। इसलिए भोजन बनाने के स्थान पर मंदिर की स्थापना करना उचित नहीं होता। घर में मंदिर की स्थापना के लिए किसी अलग स्थान का चयन करें।  

4. बेडरूम में बिलकुल ना बनायें मंदिर

घर के बेडरूम में मंदिर कि स्थापना कदापि ना करें। क्योंकि बेडरूम में हम सोने के अलावा और भी कई कार्य करते हैं जो कि पूजा करने के लिए शुभ नहीं माना जाता। जैसे कि शयनकक्ष में हम जूते-चप्पल भी रखते है। अपने मैले वस्त्र्, तौलिया, चादर आदि भी रखते हैं। इन वस्तुओं के कमरे में होने के कारण कई प्रकार की अशुद्धियाँ हो जाती हैं। और कमरा भी स्वच्छ नहीं रह पाता।

बेडरूम में हम अक्सर ही दीवारों पर कुछ ऐसी तस्वीरें लगा देते हैं जो कि पूजन के वातावरण को प्रभावित कर हमारे मन को भटकाती हैं। बेडरूम की  दीवार पर मृतकों या पूर्वजों की तस्वीर को भी ना लगायें। यदि किसी कारणवश आपके लिए कहीं और मंदिर बनाना संभव नहीं हो पा रहा हो, तो रात को सोने से पहले मंदिर के द्वार अवश्य बंद करें, या पर्दा करें।

5. एक घर में एक ही मंदिर स्थापित करें 

याद रखें कि वराह पुराण के अनुसार देव पूजन एवं मंदिर स्थापना के भी कुछ नियम हैं। जिनका पालन यदि हम नहीं करते तो इसका दोष हमें भुगतना पड़ सकता है। घर में एक ही मंदिर कि स्थापना करें ताकि आपकी पूजा के समय जिस भी देव का आवाहन किया जाए तो उसे एक निश्चित स्थान में अपनी अद्रश्य शक्ति को समाहित करें का स्थान भी मिले। यदि आपने अपने घर में दो-तीन या अधिक जगह पर मदिर की अलग-अलग स्थापना कर रखी है, तो उसे तुरंत हटायें।ऐसा करके भी आप देव-पूजन की दिव्य शक्ति को बाँट कर गलत कर रहें हैं।इसलिए मंदिर की स्थापना करते समय अपने घर में एक ही मंदिर की स्थापना करें।

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6. सीड़ियों के नीचे या बेसमेंट में मंदिर कभी न बनाएं

अपने घर में मंदिर की स्थापना सीढियों के नीचे या बेसमेंट में कभी भी ना करें। ऐसा इसलिए ना करें क्योंकि उस जगह को आप अपने आने-जाने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। उस जगह पर आपके पैरों से कई प्रकार के दूषित कण उस जगह को अपवित्र कर देते हैं। और बेसमेंट क्योंकि आपके घर में भूमि से नीचे बनी होती है। देव पूजन को अपने से नीचे का स्थान नहीं देना चाहिए। यह भी मंदिर की स्थापना के लिए शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा करना आपको लाभ के स्थान पर हानि दे सकता है। ऐसा करने से बचें।

7. मंदिर में एक ही देवता की दो तस्वीरें या दो मूर्तियाँ कभी न रखें   

यदि आपने अपने घर में मंदिर कि स्थापना करते समय एक ही देवता की दो या उससे अधिक मूर्तियाँ स्थापित कर रखी हैं तो ऐसा ना करें। क्योंकि ऐसा करने से एक ही देवता की उपसना में विरोधाभास उत्पन्न हो जाता है। ऐसा करने से देव का आवाहन भी उचित प्रकार से संभव नहीं हो सकता । किन्तु यदि आप दो मूर्तियाँ एक ही देवता की रखना भी चाहें तो उनको आमने सामने न कदापि ना रखें। ऐसा करना भी देव-पूजन में बाधक होता है।

8. मूर्तियों या तस्वीरों को एक दूसरे से चिपका कर न रखें 

घर में मंदिर कि स्थापना में लगायी गयी मूर्तियों या तस्वीरों के बीच में कुछ दूरी भी अवश्य रखें। उन्हें आपस में बिलकुल ही चिपका कर ना रखे। क्योंकि देव शक्तियां अपने आप में स्वतन्त्र रूप में विचरण करती हैं। यदि आप उन्हें आपस में चिपकाकर, सटाकर या जोड़कर रखेंगे तो आप उनकी वास्तविक कृपा के पात्र नहीं बन पायेंगे । इसलिए इन्हें एक दूसरे से, कम से कम 1 इंच की दूरी पर रखें। ऐसा करना आपको पूजा में लाभ देगा।

9. मंदिर की और पैर करके न सोयें   

वैसे तो यह बड़ी ही साधारण सी बात है कि हम जिस भी चीज़ का आदर करते हैं। उसको हम पैर कभी भी नहीं लगाते। तो जिस और घर में मंदिर हो और देवों के पूजन का स्थान बनाया गया हो उस और पैर करके कभी भी ना सोयें। यदि आपके घर में जगह ना हो तो मंदिर के स्थान को कहीं और बनायें ।

10. घर के मंदिर में पर्दा या द्वार अवश्य लगायें     

घर में मंदिर की स्थापना करने के उपरान्त और पूजन होने के समय से ही घर में देवों का निवास हो जाता है। और जिस प्रकार हम मनुष्य अपने जीवन को निजी बनाकर अपने घर में भी एकांतमई बनाते हैं। ताकि दिनचर्या के कार्य समाप्त करने के बाद हम भी आराम से अपनी निजी ज़िन्दगी को जी सकें। उसी प्रकार से घर में स्थापित मंदिर में स्थित देवताओं को भी एकांत की आवश्यकता होती है।

पूजन के बाद और रात्रि को घर के मंदिर को परदे से ढक् दें। यदि मंदिर द्वार लगाया गया हो तो उसे भी बंद कर दें। मंदिर में पर्दा या द्वार अवश्य लगायें, तथा रात को जैसे स्वयं सोते हैं वैसे ही मंदिर के द्वार भी बंद करें, या पर्दा कर दें तथा आपने जिनका भी स्वरुप अपने मंदिर में सुशोभित किया है उन्हें भी आराम करने दें। ऐसा करने से भी देवों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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11. मंदिर के पास चप्पल जूते लेकर न जायें 

यह बहुत ही साधारण सी लेकिन बहुत ज़रूरी बात है। क्योंकि जिस जगह को हम पूजनीक मानते हैं तो हमें उस जगह पर हमें गंदे पैरों से जगह को दूषित नहीं करना चाहिए । अपने घर में मंदिर की स्थापना के स्थान पर चप्पल जूते लेकर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि जूते-चप्पल पर कई प्रकार के दूषित कण लगे होते हैं। मंदिर के आस-पास का स्थान बिलकुल साफ़ सुथरा ही होना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का वहन ना हो। ऐसा करने से मंदिर का वातावरण दूषित होता है, जो कि पूजन के लिए उचित नहीं होता।

12. मंदिर में हर रोज़ सफाई ज़रूर करें 

जिस प्रकार हम रोजाना अपने घर में साफ़ सफाई करते हैं, ताकि स्वच्छ वातावरण बन सके। उसी प्रकार से हमें अपने घर में मंदिर कि स्थापना के स्थान पर हर रोज़ सफाई करनी ही चाहिए । किन्तु यदि आप हर रोज़ सफाई नहीं कर पाते तो सप्ताह में 2 बार अवश्य करें। मंदिर बनाने से पहले ही ये बात अवश्य जान लें कि आपने मंदिर में सिर्फ मूर्तियाँ या तसवीरें ही नहीं रखीं, बल्कि उन्हें देवों को अपने घर में विराजमान करवाया है, इसलिए उनका उचित ध्यान रखें। उन्हें दिन में 2 बार भोग लगायें। नहलाएं, धुलाएं, तथा सर्दी गर्मी में उनका ध्यान रखें।

घर में सही स्थान पर एवं सही प्रकार से स्थापित किया गया मंदिर घर में वास्तुदोष भी दूर करता है। ये एक उत्तम वास्तुदोष दूर करने के उपाय है।

मदिर स्थापित करते समय पवित्रता तथा शुभ मुहूर्त का ध्यान अवश्य रखें। यदि आप इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपकी पूजा का घर पर अच्छा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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