गतका एक सिख युद्धकला

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गुरुपुरब के उपलक्ष में कुछ नवयुवक गतका युद्धकला का प्रदर्शन करते हुए

क्या है गतका युद्धकला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि? (What is the historical background of Gatka warfare?)

प्राचीन काल से ही भारत को कला एवं संस्कृति का गढ़ माना जाता रहा है। भारतवर्ष के इतिहास पर यदि नज़र डालें तो ज्ञात होता है की विभिन्न प्रकार की कलाओं का जन्म इसी देश में हुआ। इन कलाओं ने समाज में कई तरह से जाग्रति एवं सामाजिक क्रांति को जगाने का कार्य किया। ऐसे ही समय में गतका(gatka a sikh martial art) नाम की एक अनोखी युद्धकला का जन्म हुआ। गतका एक सिख युद्धकला के नाम से जानी जाती है, आइये इस युद्धकला के बारे में कुछ और जानकारी लें।

क्यों पड़ी आवश्यकता गतका युद्धकला की? (Why did they need Gatka warfare?)

चिरकाल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इन कलाओं का समाज में चलन होता रहा है। मनुष्य को अपनी और दूसरों की रक्षा की खातिर इन कलाओं को अपनाना पड़ा।ऐसे ही समय में गतका एक सिख युद्धकला का जन्म हुआ इस कला को गतका युद्धकला के नाम से जाना गया। वैसे तो यह कला कई प्रकार की होती है, अर्थात शस्त्रों के साथ और बिना शस्त्रों के निहत्थे ही लड़ने वाली कला। शस्त्रों के साथ की जाने वाली कला का प्रयोग प्राचीन काल में युद्ध लड़ने के लिए किया जाता था। हर देश में राजा की एक सेना होती थी, और सेना के सिपाहियों को शस्त्र विद्या सिखाई जाती थी। ताकि देश की रक्षा हेतु युद्ध लड़ने के लिए इस कला का सदुपयोग किया जा सके।  

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कौन हैं गतका शब्द के जन्मदाता गुरु? (Who is the father of the word Gatka?)

सिख धर्म से जुडी इस युद्धकला का नाम है “गतका” इस कला को विशेषतः सिख धर्म की युद्धकला कहा जाता है। इस कला का जन्म सिख धर्म में हुआ। सिख गुरुओं ने इस कला को मानवता की भलाई के लिए समर्पित किया। इस कला के नाम के यदि अर्थ निकालें तो यह तीन अक्षरों से मिलकर बना है। पहला अक्षर “ग” का अर्थ है गति या रफ़्तार, “त” शब्द का अर्थ तालमेल और ‘का’ अर्थ काल अथवा समय माना गया है। यानि गति के तालमेल के साथ समय का सही प्रयोग। इन शब्दों से मिलकर बना शब्द ‘गतका ‘ इस शब्द के जन्मदाता सिखों के छठे गुरु ‘श्री गुरु हरगोविंद साहिब जी’ को ही माना जाता है।

कैसे हुआ जन्म इस गतका युद्धकला का? (How was born the Gatka warfare?)

इस कला के बारे जानने से पहले हम उस समय कि एतिहासिक पृष्ठभूमि पर थोड़ी नज़र डाल लें, ताकि हम यह जान सकें कि किन परिस्थितियों में इस कला का जन्म हुआ।

वैसे तो इतिहास में स्पष्ट दिखाई देता है कि सिख गुरुओं ने सदैव ही अमन एवं शांति का सन्देश दिया है। लेकिन यह इतिहास में वो समय था जब भारत में विदेशी अफगानी लुटेरे प्रवेश कर चुके थे। वह हमारे देश को लूटकर यहाँ कि बेशकीमती कलाकृतियों को यहाँ से अपने देशों में ले जा रहे थे। ऐसे समय में उनको रोकने के लिए इस शस्त्र कला को प्रयोग में लाया गया। सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद जी ने ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए शस्त्रों को धारण किया। उन्होंने स्वयं दो तलवारें धारण की, एक तलवार ‘मीरी’ (अर्थात देश और राजधर्म) की खातिर, और दूसरी तलवार ‘पीरी’ (अर्थात मानवता और धर्म) की खातिर।गुरूजी ने स्वयं भी कई युद्ध किये और जुल्म के विरुद्ध संघर्ष किया।गतका एक सिख युद्धकला को उस समय अन्याय के विरुद्ध एवं मानवता की रक्षा के लिए प्रयोग किया गया।

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 किन्होनें सर्वप्रथम सिखाई गतका शस्त्रकला? (Who taught the first thing?)

सिख धर्म के शस्त्र विद्द्या के पहले गुरु (यानि सिखों के गुरु द्रोणाचार्य) “बाबा बुड्ढा जी ” को माना जाता है। वह सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानकदेव जी के अनन्य शिष्य थे। उन्होंने स्वयं गुरु हरगोविंद जी को शस्त्र विद्या सिखाई। यहीं से ज़ुल्म के विरुद्ध हथियार उठाने का आरम्भ हुआ। अब बाबा बुड्ढा जी के सरंक्षण में सम्पूर्ण शस्त्रधारी सेना का निर्माण किया गया। इस समय कई युद्ध मुग़ल लुटेरों के खिलाफ लड़े गए। इस समय किये गए युद्धों में इस शस्त्र कला ‘गतका’ का प्रदर्शन किया गया। इस युद्धकला का प्रयोग छठे गुरु से लेकर दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी तक और उनके बाद भी कई युद्धों में किया गया। लम्बे समय तक यह गतका युद्धकला सिख इतिहास में बनी रही।

क्या है वैसाखी से गतका का सम्बन्ध? (What is the relationship of Gatka to Vaisakhi?)

गुरु गोबिंद सिंह जी ने उस समय के हालात के अनुसार सिखों को शस्त्र धारण करना अनिवार्य कर दिया। 13 अप्रैल 1699 को पंजाब, आनंदपुर साहिब में बैसाखी के दिन गुरूजी ने सिख धर्म को ‘खालसा पंथ’ का रूप देकर सिखों को तलवार पहनना अनिवार्य कर दिया। उन्होंने अपने शिष्यों को संत एवं सिपाही का रूप देकर देश और धर्म की रक्षा हेतु युद्ध लड़ने वाली बहादुर योद्धाओं की एक फ़ौज बनाई और गतका नाम की इस कला से कई युद्ध लड़े गए।

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By 13th TV

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