बच्चों के पेट के कीड़े, आयुर्वेदिक उपचार, ayurvedic medicines, घरेलु उपाय
बच्चों के पेट में कीड़े होना एक आम समस्या है

home remedies for children with stomach worms

पेट में कीड़े होने से बच्चों में शारीरिक मानसिक विकास पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। पेट में कीड़े होने का संक्रमण आम है। इनके कोई लक्षण नहीं होते है, यहाँ तक कि मेडिकल टेस्ट से भी जल्दी से पता नहीं लग पाता है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत में पांच व्यक्तियों में से एक व्यक्ति के अन्दर एक प्रकार के कीड़े का संक्रमण मिलता है। और छोटे बच्चों में इससे अधिक मात्रा में कीड़े पाए जाते है। जो की यह आम माना जाता है। छोटे बच्चो को प्रभावित करने वाले कीड़े मोटे धागे के दुकड़े जैसे आकर के दिखते है। इन कीड़ों की लम्बाई तीन मी. से दस मी. लम्बी हो सकती है। आम कीड़े होने के नाते इनसे छुटकारा पाना बहुत कम समय मे मिल जाता है।

बच्चो के पेट में कीड़े पड़ने के कारण (due to bugs in the stomach of children)

संक्रमित मिट्टी खाने से: (Eating infected soil)

अगर कोई संक्रमित व्यक्ति नित्यक्रिया संपन्न करता है। उस स्थान पर कीड़ो के अंडे बन जाते है। इसके उपरांत वह अंडे से छोटे कीड़े बन जाते है। इसके बाद वह छोटे कीड़े लार्वा का रूप ले लेते हैं। इस संक्रमित मिटटी पर बच्चों के नंगे पैर चलने से लार्वा पैर की त्वचा के भीतर घुस जाता है। यह लार्वा हुकवर्म इन्फेक्सन हो जाता है। बच्चो के द्वारा संक्रमित मिटटी को हाथों में लेने से नाख़ून में मिटटी जमा हो जाती है। इन संक्रमित हाथो को मुह में डालने से अन्य और भी कीड़े शरीर में प्रवेश कर जाते है।

अधपका संक्रमित भोजन करने से: (undercooked eating)

कुछ पौधे और सब्जियां ऐसे जगह पर उगाई जाती है। जिसकी मिटटी मल से दुसित होती है। इन सब्जियों को भली प्रकार से ना धुलने पर कीटाणुओं के अंडे सब्जियों पर ही चिपके रह जाते है। फिर सब्जियों को खाने पर हमें संक्रमण हो जाता है। यह संक्रमण मांस तथा मछलियों में भी होता है, इसलिए मांस तथा मछलियों को अच्छी तरह से पहले धुले और पूर्ण रूप से पकाकर ही खाएं।

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दूषित पानी से: (from contaminated water)

पेट में होने वाले कीड़े ऐसे होते है। जो पानी में पनपते है। कीड़े नदियों, बांधों और झीलों में पाए जाते है। इन जगहों के दुसित पानी को पीने, भोजन पकाने, तैराकी करने, और खेलने से कीड़ों से संक्रमित होने का खतरा अधिक बना रहता है। यह खतरा सबके लिए बना रहता है। किन्तु बच्चो में इस संक्रमण का खतरा जादा होता है। क्यूँ कि बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम बड़ो की अपेक्षा अविकसित होती है। पेन्सिल और चाक खाने से भी पेट में कीड़े का संक्रमण हो जाता है।

पेट में कीड़े होने के लक्षण: (symptoms of stomach worms)

1 – स्वभाव का चिडचिडा होना,

2 – वजन का घटना,

3 – काफी दिनों से पेट में दर्द तथा बार-बार मिचली आना,

4 – बच्चे के पोट्टी में खून आना,

5 – मल द्वार पे खुजली के साथ-साथ दर्द का होना,

6 – बार बार पेसाब का आना,

8 – भूख ना लगना, 

9 – पानी वाले दस्त आना,

10 – शारीरिक कमजोरी, जीभ का मलिन तथा सफ़ेद होना,

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 उपचार (the treatment)

1 – अपने बच्चों को नदी, झील और बांधो पर ना खेलने दें। बच्चे को नमी वाली मिटटी से दूर रखें।

2 – अपने हाथों को साफ़ करके के पश्चात ही अपने बच्चो को भोजन कराएँ।

3 – बच्चे के नाखून हमेशा साफ़ करें और छोटे रखें।

4 – आधा ग्राम अजवाईन के चूर्ण में चुटकी भर काला नमक मिलाकर रोज रात में गरम पानी के साथ बच्चों को दे इससे पीट में होने वाले कीड़े मर जाते है।

5 – 5-7 पपीते के बीज ताजे पानी के साथ खाने से 5 दिन में पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते है।

6 – कच्ची गाजर लगातार खाते रहने से पेट के कीड़े मर जाते है।

7 – नीबू के पत्ते में शहद मिलकर पीने से कुछ दिनों में पेट के कीड़े मर जाते है।

8 – नीम के पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते है।

9 – जीरा का काढ़ा पीने से पेट के सभी कीड़े मर जाते है।

10 – टमाटर को काट कर सेंधा नमक और पीसी हुए काली मिर्च मिलाकर खाली पेट खाने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते है।

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सुझाव:  घर को साफ़ रखें, घर में पोछा के साथ फिनायल का उपयोग करें, हाथ धोकर हे खाना खाए, बच्चे का डायपर समय समय पर बदलते रहें। बच्चो को नंगे पैर ना चलने दें और साफ़ सुथरी जगह पर ही खेलने दें। पेशाब और शौच के लिए शौचालय का इस्तेमाल करे। बासी भोजन को खाने से बचें। पानी उबालकर और फ़िल्टर कर के दें, फलों को अच्छे तरह से साफ़ कर के हे खाएं।