आयुर्वेद के 8 अंग

आयुर्वेद (Ayurveda) के 8 अंग हैं। आयुर्वेद (Ayurveda), ‘अथर्ववेद’ का ही एक भाग है। यह वेद ब्रह्मा जी द्वारा कहा गया है। आयुर्वेद (Ayurveda) में कुल एक लाख श्लोक तथा एक हज़ार अध्याय हैं। इसे सहजता से समझा व प्रयोग किया जा सके इसके लिए इसके आठ अलग अलग भाग कर दिए गए। 

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आयुर्वेद के 8 अंग इस प्रकार हैं (8 Parts of Ayurveda):-

  1. यथा-शल्य
  2. शालाक्य
  3. कायचिकित्सा
  4. भूतविद्या
  5. कौमार्भ्रित्यम
  6. अगद्तंत्र
  7. रसायांतंत्र
  8. वाजिकारान्तान्त्रभित्ति

आयुर्वेद (Ayurveda) के 8 अंग, आयुर्वेद (Ayurveda) को अपने आप में एक स्वतंत्र एवम सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति (Complete Therapy) बनाते हैं। इसे किसी अन्य चिकित्सा पद्धति (Therapy) की सहायक कहना उचित नहीं है। बल्कि आज के समय में आधुनिक चिकित्सा पद्धति (Modern Medical System) से निराश रोगी भी किसी अनुभवी वैद्य की खोज में रहते हैं। कभी-कभी कुछ वैद्य लोग अन्य पद्धतियों द्वारा रोगी का उपचार करते समय आयुर्वेदिक औषधियों का भी प्रयोग कर लेते हैं, या फिर आयुर्वेदिक आयुषधियों (Ayurvedic Medicine) से उपचार करते हुए किसी अन्य पद्धति की औषधि का भी प्रयोग कर लेते हैं। जिसकी कि ज़रा भी ज़रुरत नहीं होती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अपने आपमें सम्पूर्ण है।

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आयुर्वेद (Ayurveda) इतना विशाल है कि इसे अपने आप में ही एक वेद कहा जा सकता है। इसके समझने के लिए एक लेख या एक पृष्ठ पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसके आठों भागों को अलग अलग लेखों में समाहित करके आपके सामने रखने का प्रयास करूँगा।

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