ॐ का जप करने से होते हैं ये लाभ

स्वास्थ्य सम्बन्धी लेखों में ॐ का जप नाम का लेख आपको विचित्र लग रहा होगा। किन्तु ये विचित्र है नहीं। ॐ वास्तव में मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य का सबसे पड़ा स्रोत है। ॐ की ध्वनि आपको आत्मिक एवं मानसिक सुख एवं शांति प्रदान करती है। यहां मैं इसी पर बात करने वाली हूँ कि ॐ हमें किस प्रकार सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है।

ॐ क्या है ?

ॐ एक ध्वनि है। ॐ अनादि का, अनंत का प्रतीक है। ॐ स्वम्भू है। ॐ स्वयं ही पैदा हुआ है। ॐ कोई अक्षर नहीं है, अपितु ॐ निराकार परब्रह्म परमेश्वर का प्रतीक है। ॐ वो ध्वनि है जो सृष्टि का कारण है। मुक्ति का सीधा मार्ग भी ॐ को ही बताया गया है। ॐ की महिमा अपार है। ॐ सर्वश्रेष्ठ है। ॐ तीन ध्वनियों से मिलकर बना है, ‘अ’, ‘उ’ एवं ‘म’। ये तीनों ध्वनियाँ ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की तथा तीनों लोकों की प्रतीक हैं। गुरु नानक देव जी के अनुसार भी ओमकार की ध्वनि ही सर्वोत्तम है, सर्वश्रेष्ठ है, सत्य है।

ॐ है सभी मन्त्रों का आरम्भ

ॐ सभी मन्त्रों का आरम्भ है। ॐ को मंत्र का एक छोटा भाग मानने की भूल न करें। ॐ की यह ध्वनि ही मन्त्रों को सम्पूर्णता प्रदान करती है। सभी मन्त्रों में ॐ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है। सभी मन्त्रों का सारभूत भी ॐ ही है। पंचाक्षर और अष्टाक्षर मंत्र भी ॐ से ही आरम्भ होते हैं।

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ॐ की ध्वनि का प्रभाव

ॐ की ध्वनि के विषय में ये अनुभव किया जाता है कि ॐ के उच्चारण मात्र से ही कई प्रकार के विकार दूर हो जाते हैं। ॐ के उच्चारण से घर के सभी प्रकार के वास्तुदोषों का निवारण हो जाता है। ॐ की गूँज मात्र से ही वातावरण में सकारात्मकता आ जाती है। मानव जीवन में यदि कोई केवल ॐ का ही निरंतर जाप करे तो वो सभी कष्टों से मुक्ति पा सकता है। यही कारण है कि ॐ को मूल मंत्र भी कहा जाता है।  ॐ के जप मात्र से ही व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

ॐ का जप करने से होने वाले आध्यात्मिक लाभ

ॐ के जप से कई प्रकार के आध्यात्मिक लाभ होते हैं। मानसिक नकारात्मकता समाप्त होती है। मानसिक नकारात्मकता समाप्त हो जाने पर मनुष्य का ध्यान ईश्वर की ओर अधिक हो जाता है। आध्यात्मिकता में रुचि बढ़ने लगती है। चक्रों को जागृत करने में भी ॐ की अति महत्वपूर्ण भूमिका है। 

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ॐ का जप करने से होने वाले शारीरिक लाभ

ॐ के जप से मात्र अध्यात्मिक लाभ ही नहीं होते, अपितु हमारे शरीर पर भी इसके शुभ प्रभाव पड़ते हैं। स्वास्थ्य लाभ मिलता है। ॐ के जप से उत्पन्न होने वाले कम्पन्न से शरीर से भी नकारात्मकता समाप्त होने लगती है। इसी नकारात्मकता के समाप्त होने से शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलने लगता है। रोग या तो स्वयं ही दूर होने लगते हैं, या फिर रोगों के दूर होने की परिस्थितियां बनने लगती हैं।

ॐ का जप या ध्यान कैसे करें

ॐ का ध्यान करने के लिए आपको कुछ विशेष करने की आवश्यकता नहीं होती। इसे बड़े ही साधारण तरीके से किया जा सकता है। यदि आप सीधे बैठ सकते हैं तो सबसे अच्छा है।

सबसे पहले सीधे बैठ जाएं। बैठते समय अपनी कमर सीधी रखें। आँखें बंद कर लें। अब धीरे धीरे सांस भर लें और फिर सांस छोड़ते हुए ॐ का उच्चारण करें। आपके मुख से ये ध्वनि क्रमशः ‘ओ… ऊ… म…’ के रूप में निकलनी चाहिए। ॐ का उच्चारण करते समय अपना ध्यान अपने सांस पर केंद्रित करें। इसी क्रम को अपनी सुविधा अनुसार करें। इसका अभ्यास धीरे धीरे बढ़ाते रहे।

ॐ का जप करने के विषय में अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर दें।  

ॐ के ज्ञान को एक लेख में पिरोना असंभव है। इसलिए ॐ से जुड़े अलग अलग पहलुओं पर अलग अलग लेखों में जानकारी देने का मेरा प्रयास रहेगा।

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